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चीन में जनसंख्या सबसे धीमी गति से 1.412 अरब हुई, अगले साल से आ सकती है गिरावट


(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 11 मई (भाषा) चीन की आबादी 2019 की तुलना में 0.53 प्रतिशत बढ़कर 1.41178 अरब हो गई है हालांकि जनसंख्या वृद्धि की यह दर सबसे धीमी है। 2019 में आबादी 1.4 अरब थी।

चीन का सबसे ज्यादा आबादी वाले देश का दर्जा अब भी बरकरार है हालांकि अधिकारिक अनुमान के मुताबिक अगले साल तक इस संख्या में गिरावट आ सकती है और जिससे श्रमिकों की कमी हो सकती है और उपभोग स्तर में भी गिरावट आ सकती है ऐसे में भविष्य में देश के आर्थिक परिदृश्य पर भी इसका असर होगा।

चीन की सरकार द्वारा मंगलवार को जारी सातवीं राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक सभी 31 प्रांतों, स्वायत्त क्षेत्रों और नगरपालिकाओं को मिलाकर चीन की जनसंख्या 1.41178 अरब हो गई है जो 2010 के आंकड़ों के मुकाबले 5.8 प्रतिशत या 7.2 करोड़ ज्यादा है। इन आंकड़ों में हांगकांग और मकाउ को शामिल नहीं किया गया है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के प्रमुख निंग जिझे ने जनगणना के आंकड़ों को यहां जारी करते हुए मीडिया को बताया, “आंकड़े दर्शाते हैं कि चीन ने पिछले दशक जनसंख्या वृद्धि की धीमी गति को बरकरार रखा।”

चीन 1990 के दशक से हर 10 साल पर राष्ट्रीय जनगणना कराता है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक देश की जनसंख्या 2010 के मुकाबले 5.38 प्रतिशत या 7.206 करोड़ बढ़कर 1.41178 अरब हो गई है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा जून 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में जहां आबादी में कमी आएगी वहीं 2019 में 1.366 अरब की आबादी वाले भारत के 2027 तक दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश के तौर पर चीन से आगे निकल जाने का अनुमान है।

एनबीएस द्वारा जारी नई जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि चीन जिस संकट का सामना कर रहा था, उसके और गहराने की उम्मीद है, क्योंकि देश में 60 वर्ष से अधिक लोगों की आबादी बढ़कर 26.4 करोड़ हो गई है जो पिछले साल के मुकाबले 18.7 प्रतिशत ज्यादा है।

एनबीएस ने एक बयान में कहा कि जनसंख्या औसत आयु बढ़ने से दीर्घकालिक संतुलित विकास पर दबाव बढ़ेगा।

निंग ने कहा कि चीन में कामकाजी आबादी या 16 से 59 आयुवर्ग के लोग 88 करोड़ हैं।

सातवीं जनगणना में जनसंख्या की औसत वार्षिक वृद्धि दर 0.53 प्रतिशत थी जो 2010 में हुई छठी जनगणना में 0.57 प्रतिशत और 2000 में हुई जनगणना में 1.07 प्रतिशत थी।

चीन की जनसंख्या में सर्वोच्च 2.1 प्रतिशत वृद्धि दर 1982 में हुई जनगणना में दर्ज की गई थी और उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जिसके लिये विशेषज्ञ एक संतान की नीति को जिम्मेदार ठहराते हैं।



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