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चीन से तनाव के बीच एटमी हथियारों पर भारत का बयान- हमारी तरफ से नहीं होगा पहला वार



नई दिल्‍ली
भारत ने फिर दोहराया है कि वह दुनिया से परमाणु हथियारों के पूरी तरह खात्‍मे के लिए प्रतिबद्ध है। निशस्‍त्रीकरण पर संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) के पहले विशेष सत्र के फाइनल डॉक्‍युमेंट में भी इसी पर जोर दिया गया था। सरकार ने कहा कि वह परमाणु हथियारों से लैस देशों के खिलाफ ‘नो फर्स्‍ट यूज’ पॉलिसी पर कायम है। भारत ने साफ किया कि गैर-परमाणु शक्ति संपन्‍न देशों के खिलाफ वह परमाणु हथियारों का कभी प्रयोग नहीं करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी साल अगस्त में कहा था कि “आज तक, हमारी परमाणु नीति प्रथम उपयोग नहीं की रही है। भविष्य में क्या होता है, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।” चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच दिए गए इस बयान की विदेश में खासी चर्चा हुई। विदेशी मीडिया का एक धड़ा ऐसे संकेत दे रहा था कि भारत अपनी परमाणु नीति में कोई बदलाव करने वाला है। लेकिन श्रृंगला के बयान से साफ हो गया है कि नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया।

पाकिस्‍तान ‘फर्स्‍ट यूज’ के समर्थन मेंभारत तो ‘नो फर्स्‍ट यूज’ पॉलिसी का पालन करता है लेकिन पाकिस्‍तान इसपर राजी नहीं। उसके नेता कई बार कह चुके हैं कि पाकिस्‍तान परमाणु हथियारों का इस्‍तेमाल करने से नहीं हिचकेगा। इमरान खान सरकार में मंत्री शेख रशीद ने तो भारत पर परमाणु हमले की धमकी तक दे डाली थी। हालांकि चीन ने 1964 में यह नीति अपनाई थी और अबतक उसपर कायम है।

‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु हथियार पूर्ण उन्मूलन दिवस’ को बढ़ावा देने के लिए हुई बैठक में शामिल विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि भारत अपनी नीति पहले भी सामने रख चुका है। 2006 में यूनजीए की पहली कमिटी को सौंपे वर्किंग पेपर में और फिर 2007 में हुए निशस्‍त्रीकरण सम्‍मेलन में, इसे लेकर भारत ने अपना रुख स्‍पष्‍ट किया था।

‘आपस में बात करें न्‍यूक्लियर हथियारों से लैस देश’श्रृंगला ने कहा, “हमारा मानना है कि परमाणु निशस्‍त्रीकरण के लक्ष्‍य को चरणबद्ध प्रक्रिया के जरिए हासिल किया जा सकता है। इसके लिए वैश्विक संकल्‍प और बहुपक्षीय ढांचे की जरूरत है। भारत परमाणु शस्‍त्रों से लैस सभी देशों के बीच बातचीत की जरूरत समझता है ताकि विश्‍वास पैदा किया जा सके।” सरकार के अनुसार, भारत ने 1998 के बाद से यूएनजीए में हर साल ‘परमाणु खतरे को कम करने से जुड़े’ एक प्रस्‍ताव रखा है। इसमें परमाणु हथियारों की दुर्घटना और अनचाहे इस्‍तेमाल के खतरों को कम करने पर जोर दिया गया है।

हर साल 2 अक्टूबर को UN परमाणु हथियारों के खात्‍म के लिए एक उच्च-स्तरीय सत्र बुलाता है। इसके साथ ही महात्मा गांधी के सम्मान में उनकी जयंती पर अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर अहिंसा दिवस मनाया जाता है।

गांधी के जरिए दुनिया को संदेशश्रृंगला ने कहा, “महात्मा गांधी, जिनकी आज हम जयंती मना रहे हैं, उन्होंने कहा था- ‘आप जो भी करेंगे, वह महत्वहीन होगा, लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप उसे करें’। इसी भावना के साथ भारत परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व के महान लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अन्य देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए वैश्विक, वेरिएबल और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अपनी दीर्घकालिक और अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता है।”



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