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भारतीय वैज्ञानिकों ने आमाशय में घाव पैदा करने वाले बैक्टीरिया का जल्द पता लगाने की पद्धति खोजी


नई दिल्ली
कोलकाता के एस एन बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने मनुष्य की सांस में पाए जाने वाले ‘ब्रीथप्रिंट’ बायोमार्कर के जरिये, बैक्टीरिया से आमाशय में होने वाले घावों (पेप्टिक अल्सर) का जल्द पता लगाने की पद्धति खोजी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने शनिवार को यह जानकारी दी।

डीएसटी के तहत आने वाले संस्थान एसएनबीएनसी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में मनुष्य के सांस लेने के दौरान अंदर जाने वाले हेलीकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का पता लगाने के लिये नये बायोमार्कर की खोज की है।

डीएसटी के बयान के अनुसार टीम ने मानव श्वास में पानी की विभिन्न आणविक प्रजातियों पर किये गए अध्ययन का उपयोग किया, जिसे ‘ब्रेथोमिक्स’ विधि भी कहा जाता है। इस विधि से मनुष्य की सांस में पानी के अलग-अलग समस्थानिकों का पता लगाया जाता है।

हेलीकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया से पेट में होने वाला संक्रमण का जल्द इलाज न किया गया तो यह गंभीर रूप धारण कर सकता है। आमतौर पर पारंपरिक तथा धीरे-धीरे दर्द बढ़ाने वाली एंडोस्कोपी और बायोस्कोपी जांचों के जरिये ही इसका पता लगाया जाता है, जो शुरुआती इलाज के दौरान ठीक नहीं रहती।



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