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भारत के पास सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने का अवसर: कांत


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| Updated: 06 Oct 2020, 09:28:00 PM

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने मंगलवार को कहा कि सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण सरकार द्वारा घोषित रणनीतिक क्षत्रों में से एक है और भारत के पास इस क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने का अवसर है। ‘इंडिया पीवी एज 2020: रि-डिफाइन व्हाट इज पॉसिबल’ पर ‘ऑनलाइन’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांत ने कहा कि सरकार को खासकर उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण का भरोसा है। उन्होंने कहा, ‘‘सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) विनिर्माण रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है, जिसकी घोषणा सरकार ने कोविड-19 चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर भारत पुनरूद्धार पहल के तहत

 

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने मंगलवार को कहा कि सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण सरकार द्वारा घोषित रणनीतिक क्षत्रों में से एक है और भारत के पास इस क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने का अवसर है। ‘इंडिया पीवी एज 2020: रि-डिफाइन व्हाट इज पॉसिबल’ पर ‘ऑनलाइन’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांत ने कहा कि सरकार को खासकर उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण का भरोसा है। उन्होंने कहा, ‘‘सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) विनिर्माण रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है, जिसकी घोषणा सरकार ने कोविड-19 चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर भारत पुनरूद्धार पहल के तहत की है। भारत को सौर पीवी विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।’’ नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि बड़ा बाजार और जरूरी विनिर्माण संबंधी लाभ के साथ भारत अत्याधुनिक पूरे मूल्य श्रृंखला में पीवी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर विनिर्माण गंतव्य बन सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, जहां भारत के पास सौर पीवी विनिर्माण के लिए वैश्विक केंद्र होने का अवसर है और विशेष रूप से उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण को लेकर भरोसा है।’’ कांत ने उम्मीद जतायी कि पीवी प्रौद्योगिकी में सुधार, बाजार उम्मीदों से अधिक होगा और सौर ऊर्जा परियोजनाओं की लागत में कमी लाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसी कार्यक्रम में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि सरकार प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत भारत में 31,000 मेगावाट मांग है। इसके लिये स्थानीय रूप से विनिर्मित सौर पैनलों की जरूरत है। यही अगले 10 साल में 3,000,00 मेगावाट का बड़ा लक्ष्य है। कुमार ने पीवी विनिर्माण करने वाले उद्योग से इस बड़े मांग का उपयोग कर अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधा में निवेश करने और सौर पैनल के प्रदर्शन को निरंतर बेहतर बनाने तथा लागत में कमी लाने को लेकर स्टार्ट-अप तथा शोध संस्थानों के साथ गठजोड़ का आग्रह किया। आधिकारिक बयान के अनुसार सौर पीवी विनिर्माण उन रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है, जिसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की है। सरकार देश में हर गांवों में खासकर कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग के लिये निरंतर प्रयास कर रही है।

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