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मोदी सरकार के पहले मंत्री जिन्होंने प्लाज्मा डोनेट किया, सोशल मीडिया पर तारीफ


नई दिल्ली
देश में कोरोना संकट के बीच ठीक हो रहे मरीजों की संख्या का अनुपात भले ही बढ़ रहा है,लेकिन गम्भीर मरीजों के ईलाज के लिए प्लाज्मा थेरपी ही बड़े कारगर विकल्प के रूप में सामने आई है। हालांकि covid-19 वायरस से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ होने वाले प्लाज्मा डोनर की संख्या अभी भी बहुत कम है। यदि यह संख्या बढ़ जाए तो बहुत से गम्भीर कोरोना पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है। इस बीच मोदी सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान प्लाज्मा डोनेट करने खुद आगे आकर न सिर्फ एक मिसाल कायम की है, बल्कि लोगों को भी प्लाज्मा थेरपी व प्लाज्मा डोनेशन के लिए प्रेरित भी किया है।

एससीबी मेडिकल कॉलेज में प्लाज्मा डोनेट किया
शनिवार को केंद्रीय मंत्री प्रधान अपने गृह राज्य ओडिसा के कटक में एससीबी मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल पहुँच कर अपना प्लाज्मा डोनेट किया। इस तरह वह पहले केंद्रीय मंत्री हैं जिन्होंने कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद अपना प्लाज्मा डोनेट किया है। यहाँ उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले ही धर्मेंद्र प्रधान कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद डॉक्टरों की सलाह व उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने कार्य में वापस लौट आए।


लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कोरोना उपचार के बाद स्वस्थ्य हुए लोगों से अपनी एंटीबॉडीज (प्लाज्मा डोनेट) करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा इससे एक ओर हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं वहीं यह हमारे समाज के प्रति दायित्व को निभाने का भी अवसर है।

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जानिए क्या है प्लाज्मा डोनेशन?

भारत में कोरोना मरीजों के परिजन प्लाज़्मा डोनर की तलाश करते दिखाई दे रहे हैं. जबकि प्लाज्मा दान करने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं. प्लाज्मा दानकर्ता न मिलने के पीछे प्लाज्मा दान के खतरों का अनुमान और डर बताया जा रहा है। हमारे रक्त में चार प्रमुख अवयव होते हैं। डब्ल्यूबीसी, आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा। आजकल किसी को भी होल ब्लड (चारों सहित) नहीं चढ़ाया जाता. बल्कि इन्हें अलग-अलग करके जिसे जिस चीज की ज़रूरत हो वो चढ़ाया जाता है. प्लाज्मा, रक्त में मौजूद 55 फीसदी से ज्यादा हल्के पीले रंग का पदार्थ होता है, जिसमें पानी, नमक और अन्य एंजाइम्स होते हैं। ऐसे में किसी भी स्वस्थ मरीज जिसमें एंटीबॉडीज़ विकसित हो चुकी हैं, का प्लाज़्मा निकालकर दूसरे व्यक्ति को चढ़ाना ही प्लाज्मा थेरेपी है।



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