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कोरोना के इलाज के दौरान बुजुर्ग लापता! हाई कोर्ट के आदेश पर रोक के लिए अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूपी सरकार, जानें पूरा मामला


नई दिल्ली
यूपी के प्रयागराज स्थित एक अस्पताल में कोविड का इलाज कराने गए 82 साल के बुजुर्ग के गायब होने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से अस्पतालों के बारे में डिटेल में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOG) पेश करने को कहा था। अब उसके खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने अर्जी दाखिल कर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट में हेबियस कॉरपस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) रिट दाखिल की गई थी जबकि याचिकाकर्ता के पिता किसी हिरासत में नहीं थे और ऐसे में हेबियस कॉरपस का मामला नहीं बनता। उस याचिका में जो स्पोक है उसके इतर जाकर हाई कोर्ट ने आदेश पारित किया है। ऐसे में उस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

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हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यूपी के हेल्थ व फैमिली वेलफयेर के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी से कहा है कि वह राज्य के तमाम अस्पतालों के एसओपी के बारे में डिटेल पेश करे। दरअसल हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर कहा था कि उनके 82 साल के पिता को कोविड के इलाज के लिए प्रयागराज स्थित टीबी सप्रू अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन वह 8 मई 2021 को गायब हो गए। इस मामले में हेबियस कॉरपस रिट दाखिल कर यह भी कहा गया कि किस परिस्थिति में पिता गायब हुए उसकी जांच होनी चाहिए। तब हाई कोर्ट ने आदेश पारित किया और यूपी सरकार से कहा कि वह राज्य के तमाम अस्पतालों को लेकर जो एसओपी तैयार किया गया है उसका डिटेल पेश करे और उसके अमल के बारे में कोर्ट को जानकारी दें।
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सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए यूपी सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस रिट के स्कोप के बाहर जाकर आदेश पारित कर दिया और तमाम निर्देश जारी किए हैं और टीबी सप्रू हॉस्पिटल प्रयागराज के सीनियर सुपरिेंटेंडेंट के खिलाफ तमाम स्ट्रक्चर पास किए हैं। 82 साल के बुजुर्ग किसी हिरासत में नहीं थे। उन्हें तलाश करने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं।

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