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क्रीमी लेयर बढ़ाने वाली है सरकार, 4 हफ्ते के लिए नीट काउंसलिंग पर लगी रोक



नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नीट पीजी काउंसलिंग प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं होगी जब तक केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस के लिए 8 लाख रुपये की लिमिट पर दोबारा फैसला नहीं ले लेती है। सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने कहा है कि वह ईडब्यूएस के लिए आठ लाख रुपये की जो लिमिट तय कर रखी है उस बारे में दोबारा विचार करेगा। चार हफ्ते में दोबारा विचार कर फैसला लिया जाएगा और तब तक नीट की काउंसलिंग रुकी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया है और अगली सुनवाई के लिए 6 जनवरी की तारीख तय कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कई बार सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि था आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) घोषित करने के लिए आठ लाख रुपये सलाना आमदनी से कम आमदनी का जो क्राइटेरिया तय किया गया है उसके लिए उसने क्या एक्सरसाइज किया है। केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि वह बताए कि जो मानदंड तय किया गया है उसके पीछे क्या आधार है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि क्या आपने आठ लाख रुपये की आमदनी का जो क्राइटेरिया तय किया है उस पर दोबारा विचार करेंगे?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि केंद्र सरकार ने इसके लिए जो क्राइटेरिया तय किया है वह मनमाना नहीं है बल्कि फैसले से पहले विस्तार से चर्चा की गई है। केंद्र सरकार ने 29 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले नीट परीक्षा में ऑल इंडिया कोटा के तहत ओबीसी को 27 फीसदी और आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट को 10 फीसदी रिजर्वेश देने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।

काउंसलिंग नहीं होने के कारण एडमिशन में देरी
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें निर्देश मिला है कि केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस के लिए तय 8 लाख रुपये के क्राइटेरिया पर दोबारा विचार करेगा। हम फिर से इसे फॉर्मूलेट करेंगे जो नया फैसला लिया जाएगा वह चार हफ्ते में होगा और तब तक काउंसलिंग नहीं होगी। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के लिए तय किए जाने वाला क्राइटेरिया अगले साल से अमल में हो क्योंकि काउंसलिंग नहीं होने के कारण एडमिशन में देरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि आप ऑप्शन देखिये। आप जो करना चाहते हैं करें लेकिन क्या यह अगले साल से लागू हो सकेगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार लिए मुश्किल हो सकता है क्योंकि जो भी होगा वह संविधान के संशोधन के तहत होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप जो भी करें कानून के तहत करें और चार हफ्ते का वक्त कम नहीं है। हम मेडिकल एडमिशन को लेकर चिंतित हैं।



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