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Hathras Case: यूपी के रिटायर्ड जज ने सुप्रीम कोर्ट में डाली अर्जी, कहा-पीड़ित परिवार से छीना गया अंतिम सस्कार का मौलिक अधिकार


नई दिल्ली
विपक्ष के विरोध के बीच हाथरस मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। यूपी के एक रिटायर्ड जज ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि पीड़ित और उनके परिजनों को अंतिम संस्कार के बेसिक अधिकार से वंंचित किया गया है और इस मामले में यूपी के एडीसी से लेकर डीएम व एसपी के रोल की जांच की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि इन पुलिस अधिकारियों के रोल की जांच का आदेश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार, डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर), हाथरस के डीएम, एसपी, अडिशनल एसपी और सर्किल ऑफिस को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मौलिक अधिकार के हनन का मामला उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से दखल की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि मामले में विक्टिम के साथ रेप और मर्डर के आरोप हैं। 29 सितंबर को 19 साल की बच्ची की मौत हुई लेकिन मौत के बाद यूपी पुलिस प्रशासन ने विक्टिम व उनके परिजनों को अंतिम संस्कार के बेसिक अधिकार से वंचित कर दिया। इस मामले में एडीजी, डीएम, एसपी, अडिशनल एसपी, सर्किल ऑफिसर ने विक्टिम के माता-पिता और भाई को विक्टिम के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया। जबकि हिंदू मान्यताओं के हिसाब से गरुड़ पुराण के तहत अंतिम संस्कार में भाई-पिता आदि को अंतिम संस्कार में शामिल होना अनिवार्य था।

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हिंदू रीति रिवाज के तहत मृतक को उनके सबसे नजदीकी रिश्तेदार मुख्याग्नि देते हैं साथ ही घी आदि का प्रयोग अंतिम संस्कार में होता है लेकिन इस मामले में जो मीडिया रिपोर्ट है उसके तहत किसी ज्वलनशील पदार्थ से शव को जलाया गया और उक्त रीति रिवाज का अनुशरण नहीं किया गया। विक्टिम व परिजनों को बेसिक अधिकार से वंचित किया जाना अमानवीय है और मामले मेंं एडीजी से लेकर जिला डीएम, एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उनके रोल की जांच की जाए।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों का जजमेंट है कि मौलिक अधिकार के दायरे में गरिमा के साथ मरने का अधिकार भी शामिल है। याची की अर्जी में कहा गया है कि गरिमा के साथ मरने के दायरे में अंतिम संस्कार भी शामिल है। इस मामले में उक्त पुलिस अधिकारियों व डीएम के रोल की जांच की जाए। इन पर आरोप है कि इन्होंने विक्टिम के अंतिम संस्कार के बेसिक अधिकार को छीना और इस तरह से लाश का अपमान हुआ है ऐसे में रोल की जांच की जाए।

विक्टिम फैमली ने इन लोगों पर जो आरोप लगाया है अगर वह सही है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर केस दर्ज होना चाहिए। साथ ही विक्टिम के परिजनों का मैजिस्ट्रेट के कोर्ट में धारा-164 के तहत बयान दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, तामिलनाडु के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि हाथरस कांड के बाद यूपी में मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है ऐसे में वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।



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