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Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर संशय, अब आदि कैलाश पर फोकस


नई दिल्ली
अप्रैल महीने से शुरू होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल होना भी मुश्किल नजर आ रहा है। अब तक इसकी तैयारियों के लिए कोई मीटिंग नहीं हुई है। पिछले साल कोविड-19 की वजह से यह यात्रा नहीं हो पाई थी, इस साल भी संशय बरकरार है। इस यात्रा को कराने में अहम जिम्मेदारी निभाने वाला कुमाऊं मंडल विकास निगम अब धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में आदि कैलाश को विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है।

पिछले साल भी नहीं हो पाई थी यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड के कुमाऊं से होकर जाती है। लिपुलेख दर्रे को पार कर चीन की सीमा में प्रवेश कर कैलाश मानसरोवर तक पहुंचते हैं। कुमाऊं मंडल विकास के अध्यक्ष केदार जोशी ने कहा कि कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है और चीन में भी अभी हालात ठीक नहीं हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि इस बार हम इस यात्रा को करा पाएंगे। अगर यात्रा करनी होती तो अभी से तैयारियां शुरू हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वैसे कुमाऊं मंडल विकास निगम की तरफ से अपनी पूरी तैयारियां हैं। अगर विदेश मंत्रालय फैसला लेता है तो हम यात्रा शुरू करने को तैयार हैं।

आदि कैलाश यात्रा पर दिया जाएगा जोर
कैलाश मानसरोवर यात्रा में संशय के बीच कुमाऊं मंडल विकास निगम आदि कैलाश को धार्मिक पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित करने की सोच रहा है। केदार जोशी ने कहा कि मैं अप्रैल महीन में एक टीम लेकर आदि कैलाश जा रहा हूं और सर्वे किया जाएगा। सर्वे में तय किया जाएगा कि कौन से दो रास्ते हो सकते हैं, एक आदि कैलाश जाने के लिए और एक आदि कैलाश से वापस आने के लिए। उन्होंने कहा कि मानसरोवर से पहले यही कैलाश था जहां भगवान शंकर और मां पार्वती रहते थे। वे बाद में कैलाश मानसरोवर गए। आदि कैलाश में भी ताल है जिसमें श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। यह हमारी सरहद में हैं और इस यहां लाखों यात्री जा सकते हैं। वहां कई दर्शनी स्थल भी हैं।



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